देहरादून।
उत्तराखंड में आगामी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से पहले चल रही बीएलओ (Booth Level Officer) मैपिंग प्रक्रिया में सुस्ती सामने आई है। इसको गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने प्रदेश के तीन जिलों को नोटिस जारी किया है और प्रगति में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, मतदाता सूची के अद्यतन और सत्यापन के लिए बीएलओ मैपिंग एक महत्वपूर्ण चरण होता है। इसी के आधार पर प्रत्येक बूथ पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाती है, जिससे आगामी चुनावों के दौरान मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। चुनाव आयोग ने पाया कि कुछ जिलों में यह प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के अनुसार पूरी नहीं हो रही है। इसी कारण संबंधित जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों से जवाब तलब किया गया है। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्य के मुख्य निर्वाचन कार्यालय ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी जिलों को निर्देश जारी किए हैं कि बीएलओ मैपिंग कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। अधिकारियों को फील्ड स्तर पर निगरानी बढ़ाने और समयबद्ध तरीके से रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है। चुनाव आयोग का मानना है कि मतदाता सूची की सटीकता लोकतांत्रिक प्रक्रिया की नींव है, इसलिए इसमें किसी भी तरह की ढिलाई भविष्य में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में आयोग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि समयसीमा के भीतर कार्य पूरा न करने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।












