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बिजली दरों पर ब्रेक: जनता को राहत या चुनावी रणनीति?”

देहरादून:
उत्तराखंड में आम जनता को राहत देते हुए सरकार ने फिलहाल बिजली दरों में बढ़ोतरी नहीं करने का फैसला लिया है। जहां एक ओर इस निर्णय से लोगों को महंगाई के दौर में बड़ी राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर इसको लेकर सियासी गलियारों में चर्चा भी तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि हर साल की तरह इस बार भी बिजली दरों में संशोधन की उम्मीद थी, लेकिन सरकार ने चुनावी वर्ष को देखते हुए फिलहाल दरों को स्थिर रखने का फैसला लिया। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ छोटे व्यापारियों को भी राहत मिलेगी। हालांकि विपक्ष इस फैसले को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह से चुनाव को ध्यान में रखकर लिया गया है, ताकि जनता को साधा जा सके। वहीं सरकार का पक्ष है कि यह निर्णय पूरी तरह जनता के हित में लिया गया है और महंगाई के दबाव को कम करने के लिए जरूरी था। ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल बिजली कंपनियों के प्रस्तावों पर विचार किया गया, लेकिन आम जनता पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसलिए दरें नहीं बढ़ाई गईं। अब बड़ा सवाल यही है कि क्या यह फैसला वास्तव में जनता को राहत देने के लिए है या फिर इसके पीछे चुनावी रणनीति छिपी है? आने वाले समय में इसका राजनीतिक असर जरूर देखने को मिल सकता है।

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