देहरादून। उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। लगातार हो रही बारिश के बीच रविवार को मसूरी-देहरादून मार्ग पर पानी वाले बैंड के पास भारी भूस्खलन होने से यातायात प्रभावित हो गया। सड़क पर मलबा आने के कारण दोनों ओर वाहनों की आवाजाही रुक गई और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
मौसम विज्ञान केंद्र ने भी राज्य में अगले कुछ दिनों के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 30 अगस्त से 2 सितंबर के बीच कई क्षेत्रों में तेज बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और सड़क बंद होने का खतरा बढ़ गया है।
मसूरी-देहरादून मार्ग पर बढ़ी मुश्किल
रविवार को पानी वाले बैंड के पास भूस्खलन के बाद सड़क पर बड़ी मात्रा में मलबा आ गया। इसके चलते मसूरी और देहरादून के बीच आवाजाही प्रभावित हुई। प्रशासन और संबंधित विभाग सड़क से मलबा हटाने और यातायात सामान्य करने के प्रयास में जुटे हैं।
लगातार बारिश के कारण मसूरी क्षेत्र में पहले भी कई बार भूस्खलन की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में यात्रियों को पहाड़ी मार्गों पर बेहद सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
नैनीताल और चमोली में भी बारिश का असर
राज्य के दूसरे पहाड़ी जिलों में भी बारिश के कारण हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। नैनीताल-काठगोदाम मार्ग पर भूस्खलन और बोल्डर गिरने से आवाजाही प्रभावित होने की खबर है, जबकि चमोली के कर्णप्रयाग क्षेत्र में बारिश के बाद मलबा आने से मकान और दुकानों पर खतरा बढ़ा है।
दारमा वैली को लेकर भी चिंता
वाडिया संस्थान के अध्ययन में सीमांत दारमा वैली के करीब 58 फीसदी क्षेत्र को भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील बताया गया है। मानसून के दौरान इस तरह के संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जरूरत और बढ़ जाती है।
प्रशासन की अपील: पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोग मौसम और सड़क की स्थिति की ताजा जानकारी लेने के बाद ही सफर करें। भूस्खलन प्रभावित स्थानों और नदी-नालों के बेहद करीब जाने से बचें।








