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स्लग – पंडित गोविंद बल्लभ पंत जयंती समारोह
देहरादून। भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की 139वीं जयंती के अवसर पर देहरादून स्थित आईआरडीटी ऑडिटोरियम में विशेष जयंती समारोह का आयोजन किया गया। उत्तराखंड संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में पंडित गोविंद बल्लभ पंत के राष्ट्र और समाज के लिए किए गए योगदान को याद करते हुए उनके विचारों और आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। पंडित पंत की 139वीं जयंती 10 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी मौजूद रहीं, जबकि देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में पंडित गोविंद बल्लभ पंत के जीवन, उनके राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सरोकारों और देश निर्माण में उनके योगदान को याद किया गया।
राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित रहा पंत का जीवन
विधानसभा अध्यक्ष ऋतु भूषण खंडूड़ी ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत को नमन करते हुए कहा कि वे केवल भारत रत्न से सम्मानित महान व्यक्तित्व ही नहीं, बल्कि प्रखर राष्ट्रवादी और समाजसेवी भी थे। उन्होंने अपने पूरे जीवन में देश और समाज के हित में लगातार कार्य किया।
उन्होंने कहा कि जमींदारी उन्मूलन और किसानों के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सुधारों में पंडित गोविंद बल्लभ पंत की अहम भूमिका रही। उन्होंने समाज के वंचित और पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी महत्वपूर्ण प्रयास किए।
ऋतु भूषण खंडूड़ी ने कहा कि पंडित पंत महिलाओं की स्थिति और उनके सशक्तीकरण को लेकर भी गंभीर चिंतन रखते थे। उनका मानना था कि समाज और राष्ट्र की प्रगति में महिलाओं की बराबर भागीदारी जरूरी है।
युवाओं के लिए आज भी प्रेरणास्रोत हैं पंत
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत का सबसे प्रेरणादायक संदेश था कि राष्ट्र हमेशा सर्वोपरि होना चाहिए। उनकी राष्ट्रवादी सोच, विचारधारा और समाज के प्रति समर्पण आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
उन्होंने युवा पीढ़ी से पंडित गोविंद बल्लभ पंत के जीवन और उनके विचारों को समझने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र और समाज के विकास में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।
गौरतलब है कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में रहे और स्वतंत्रता के बाद उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री तथा देश के गृह मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। उनके सामाजिक सुधारों और राष्ट्र निर्माण में योगदान को आज भी याद किया जाता है।








