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उत्तराखंड में आज से जनगणना का काम शुरू, बर्फबारी से पहले 131 दूरस्थ गांवों में होगी गणना

देहरादून। उत्तराखंड में जनगणना की प्रक्रिया आज से शुरू हो गई है। राज्य के चार सीमांत और पर्वतीय जिलों—उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़—के दूरस्थ इलाकों में जनगणना का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया गया है। इन चार जिलों के कुल 131 गांवों में जनगणना अधिकारी और कर्मचारी पहुंचकर गणना का कार्य कर रहे हैं।

बर्फबारी से पहले पूरा किया जा रहा है जनगणना का काम

जनगणना निदेशक ईवा आशीष के मुताबिक, राज्य के ऐसे दूरस्थ गांवों में पहले जनगणना कराई जा रही है जहां सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी के कारण आवागमन प्रभावित हो जाता है। मौसम खराब होने और बर्फबारी शुरू होने से पहले जनगणना अधिकारियों को इन क्षेत्रों में भेजा जा रहा है, ताकि निर्धारित समय के भीतर जनगणना का काम पूरा किया जा सके।

उन्होंने बताया कि संबंधित क्षेत्रों में जनगणना अधिकारी पहुंचना शुरू हो गए हैं और आज से विधिवत गणना प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ भी शामिल

इस विशेष चरण में सिर्फ गांव ही नहीं, बल्कि तीन महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को भी शामिल किया गया है। गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ में भी पहले चरण में जनगणना का काम किया जा रहा है।

इन क्षेत्रों में सर्दियों के दौरान मौसम बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है और कई स्थानों पर भारी बर्फबारी के कारण संपर्क मार्ग बंद हो जाते हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से इन इलाकों में समय रहते जनगणना पूरी करने की तैयारी की गई है।

चार जिलों पर विशेष फोकस

जनगणना के शुरुआती चरण में उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ जैसे दुर्गम पर्वतीय जिलों पर विशेष फोकस किया गया है। इन क्षेत्रों के गांव भौगोलिक रूप से कठिन इलाकों में स्थित हैं और सर्दियों में बर्फबारी के चलते यहां पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

इसी वजह से जनगणना विभाग ने मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए पहले इन गांवों को कवर करने की रणनीति अपनाई है।

अधिकारियों की टीमें गांवों में पहुंचीं

जनगणना निदेशक ईवा आशीष ने बताया कि जनगणना से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी संबंधित क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। उनका उद्देश्य बर्फबारी शुरू होने से पहले इन दुर्गम क्षेत्रों की जनगणना प्रक्रिया को पूरा करना है।

राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में जनगणना की यह प्रक्रिया प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि दूरस्थ और सीमावर्ती इलाकों में रहने वाली आबादी का सही आंकड़ा विकास योजनाओं और सरकारी नीतियों के लिए अहम होता है।

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