देहरादून। उत्तराखंड में शिक्षक भर्ती से जुड़े कथित फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र मामले में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने 234 प्रवक्ताओं की दिव्यांगता की दोबारा जांच कराने का फैसला लिया है। यह जांच AIIMS Rishikesh में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा की जाएगी। जानकारी के अनुसार, शिक्षक भर्ती के दौरान कुछ अभ्यर्थियों द्वारा कथित तौर पर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र लगाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद सरकार और शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया।
बताया जा रहा है कि सभी 234 प्रवक्ताओं को निर्धारित तिथि पर एम्स ऋषिकेश में मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित होना होगा, जहां उनकी दिव्यांगता की सत्यता की जांच की जाएगी। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। सरकार का कहना है कि यदि जांच में किसी भी अभ्यर्थी का प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवश्यक कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे। इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग और प्रशासन सतर्क हैं और पूरी प्रक्रिया को निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने की तैयारी की जा रही है।












