चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टेल रेस टनल (TRT) में हुए भीषण हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है। सुरंग के भीतर अचानक पानी और मलबा घुसने से कई श्रमिक अंदर फंस गए। हादसे में अब तक 7 श्रमिकों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 11 घायल हैं और 3 श्रमिक अभी भी सुरंग के अंदर फंसे बताए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा
शुक्रवार सुबह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चमोली जिले के पीपलकोटी के मायापुर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान का स्थलीय निरीक्षण किया और अधिकारियों से हादसे की पूरी जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन विभाग, पुलिस, SDRF, NDRF, ITBP और सेना की टीमों से बचाव अभियान की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सुरंग में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए।
मुख्यमंत्री ने अस्पताल पहुंचकर घायल श्रमिकों का हालचाल भी जाना और चिकित्सकों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि घायलों के इलाज में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया जाए।
कैसे हुआ पीपलकोटी टनल हादसा?
जानकारी के मुताबिक हादसा गुरुवार शाम करीब 6:45 से 7:05 बजे के बीच हुआ। उस समय सुरंग के भीतर करीब 22 से 28 श्रमिक काम कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि सुरंग के करीब 1.4 से 1.5 किलोमीटर अंदर अचानक भूस्खलन या कैविटी बनने के कारण पानी और भारी मात्रा में मलबा सुरंग में आ गया। अचानक पानी और मलबा आने से श्रमिकों को बाहर निकलने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका और कई मजदूर सुरंग के अंदर फंस गए।
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंच गए। इसके बाद सुरंग के अंदर फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
7 श्रमिकों की मौत, 11 घायल और 3 अभी भी फंसे
रेस्क्यू अभियान के दौरान अब तक 7 श्रमिकों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं 11 घायल श्रमिकों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है। एक घायल श्रमिक को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी भी दी जा चुकी है।
सुरंग के अंदर फंसे तीन श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालना बचाव टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। मलबा हटाने और सुरंग से पानी निकालने का काम लगातार जारी है।
मौके पर NDRF, SDRF, ITBP और सेना की टीमें बचाव अभियान में जुटी हुई हैं।
घायल श्रमिकों की सूची
घायल श्रमिकों में सुनील दीवान (20), हारबील गुड़िया (27), निस्तर भिंगरा (24), विनोद रावना (46), दीना बेगरा (26), खेला राम बिसरा (22), सुबेक सिंह, तिलक राज (48), पैन सिंह (33), रोहित पांडे और गोविंद मंडाल शामिल हैं।
इनमें अलग-अलग राज्यों के श्रमिक शामिल हैं। गोविंद मंडाल को उपचार के बाद अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
मृतक श्रमिकों के नाम
हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों में प्रदीप पंवार (35), मुकेश सिंह, दुर्लभ शर्मा, विजय हंसदा, जितेंद्र कुमार, लोकेश्वर और भुवनेश्वर शामिल हैं।
मृतकों में उत्तराखंड के अलावा उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के श्रमिक भी शामिल हैं।
तीन श्रमिक अभी भी सुरंग में फंसे
रेस्क्यू टीमों के अनुसार तीन श्रमिक अभी भी सुरंग के अंदर फंसे हुए हैं। इनमें लुकास टोपनों (झारखंड), चेतन पोयाम (छत्तीसगढ़) और देवनाथ (छत्तीसगढ़) शामिल हैं।
इन श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव दल मलबा हटाने और पानी निकालने में जुटे हैं। सुरंग के भीतर परिस्थितियों को देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद सावधानी के साथ चलाया जा रहा है।
जांच के लिए पहुंचेगी THDC की तकनीकी टीम
हादसे की तकनीकी जांच के लिए दिल्ली से THDC की विशेषज्ञ तकनीकी टीम मौके पर पहुंच रही है। यह टीम हादसे के कारणों और सुरंग के भीतर अचानक पानी व मलबा आने की परिस्थितियों का तकनीकी आकलन करेगी।
बताया गया है कि THDC के CMD सिपन कुमार गर्ग के नेतृत्व में टीम घटनास्थल का निरीक्षण करेगी।
अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी सीएम धामी ने किया संपर्क
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे में प्रभावित श्रमिकों के संबंध में झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से भी संपर्क किया। उन्होंने संबंधित राज्यों के श्रमिकों की स्थिति और राहत-बचाव अभियान की जानकारी साझा की।
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार राहत और बचाव कार्य में किसी तरह की कमी नहीं आने देगी और सभी फंसे श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
सुरंग निर्माण की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
पीपलकोटी की इस घटना ने उत्तराखंड में निर्माणाधीन सुरंगों में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में सुरंग निर्माण के दौरान भूगर्भीय परिस्थितियां, पानी का दबाव, मलबा और अचानक होने वाले भूस्खलन बड़ी चुनौती बनते हैं।
फिलहाल प्रशासन और बचाव एजेंसियों का पूरा ध्यान सुरंग में फंसे तीनों श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने पर है। रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद हादसे के वास्तविक कारणों की तकनीकी जांच से स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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