देहरादून में महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक तापमान तेज हो गया है। देश में 33% महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर मंगलवार को उत्तराखंड प्रदेश महिला कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए विधानसभा घेराव किया। प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन में सैकड़ों महिला कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आईं और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कार्यक्रम की शुरुआत हिम पैलेस, नेहरू कॉलोनी से हुई, जहां बड़ी संख्या में महिला कांग्रेस की पदाधिकारी, कार्यकर्ता और मातृशक्ति एकत्रित हुईं। इसके बाद एक विशाल आक्रोश मार्च विधानसभा की ओर निकाला गया। पूरे मार्ग में “महिला आरक्षण लागू करो” और “आधी आबादी को पूरा हक दो” जैसे गगनभेदी नारों से माहौल गूंज उठा।
हालांकि विधानसभा से पहले ही पुलिस प्रशासन ने बैरिकेडिंग लगाकर मार्च को रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश में हल्की झड़प भी हुई, जिसके बाद पुलिस ने कई महिला कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पुलिस लाइन भेज दिया। इस कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों का आक्रोश और बढ़ गया। इस मौके पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत भी मौके पर पहुंचे और आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को उनका संवैधानिक अधिकार देने में देरी लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है और सरकार को तुरंत महिला आरक्षण लागू करना चाहिए। प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संसद द्वारा 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बावजूद आज तक 33% महिला आरक्षण लागू नहीं किया जाना सरकार की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनगणना और परिसीमन के नाम पर महिलाओं के अधिकार को लगातार टाला जा रहा है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक महिलाओं को उनका हक नहीं मिल जाता, महिला कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि अब देश और प्रदेश की महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह जागरूक हो चुकी हैं और उन्हें दबाया नहीं जा सकता। प्रदर्शन में जया कर्नाटक, पुष्पा पवार, अंशुल त्यागी, आशा रावत, सुशीला शर्मा, अंजू मिश्रा, शशि शाह, अनीता सकलानी और शोभा बडोनी समेत कई वरिष्ठ महिला नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहीं। इसके अलावा युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में आम महिलाओं की भागीदारी ने इस आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिया।
अंत में महिला कांग्रेस ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही महिला आरक्षण लागू नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा।







