देहरादून: राजधानी देहरादून स्थित दून मेडिकल कॉलेज में महिला पत्रकार के साथ कथित बदसलूकी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना ने न सिर्फ पत्रकारिता की स्वतंत्रता बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार, पत्रकार मीना नेगी अस्पताल में व्यवस्थाओं को लेकर रिपोर्टिंग करने पहुंची थीं। इसी दौरान एक डॉक्टर पर आरोप है कि उन्होंने जांच के नाम पर मामले को दबाने की कोशिश की और पत्रकार के साथ अनुचित व्यवहार किया। मामला यहीं नहीं थमा, बल्कि स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पत्रकार को घंटों चौकी में बैठाए रखने की बात सामने आई। आरोप है कि पूरे प्रकरण को अंततः सिर्फ “माफी” के सहारे निपटाने की कोशिश की गई, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं—क्या यही न्याय है?
इस घटना के बाद पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में आक्रोश देखा जा रहा है। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का मामला नहीं बल्कि सच दिखाने की कोशिश करने वाले हर पत्रकार की लड़ाई है।
विरोध करने वालों का साफ कहना है कि अस्पताल प्रबंधन अपनी सेवाओं में सुधार करने के बजाय सवाल उठाने वालों को दबाने में जुटा है। “माफी नहीं, जवाब चाहिए” की मांग अब जोर पकड़ रही है, और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की बात कही जा रही है। फिलहाल इस मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक रवैये दोनों पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस पूरे मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।








