देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब देहरादून की विशेष अदालत ने आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के एक मामले में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को नोटिस जारी करते हुए 3 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए। अदालत के इस आदेश के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने भाजपा सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा मामला किसी कांग्रेस नेता से जुड़ा होता तो अब तक प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई शुरू हो चुकी होती, लेकिन मंत्री गणेश जोशी के मामले में सरकार चुप्पी साधे हुए है।
हरक सिंह रावत ने सवाल उठाया कि मंत्री गणेश जोशी द्वारा अर्जित बताई जा रही संपत्ति की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि इतनी संपत्ति का स्रोत क्या है। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी व्यक्ति के साथ राजनीतिक आधार पर अलग-अलग व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने अपने पुराने मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि जब भाजपा ने उनके खिलाफ आरोप लगाए थे, तब उनके आवास पर ED और CBI की कार्रवाई कराई गई थी। उन्होंने दावा किया कि जांच में उनके खिलाफ कुछ भी साबित नहीं हुआ, लेकिन अब जब भाजपा सरकार के एक मंत्री पर अदालत ने संज्ञान लिया है, तब जांच एजेंसियां सक्रिय नजर नहीं आ रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद उत्तराखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कांग्रेस इसे सरकार की जवाबदेही और निष्पक्षता का मुद्दा बना रही है, जबकि भाजपा की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। अदालत द्वारा जारी नोटिस के अनुसार कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी को 3 सितंबर 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना है। आगे की कार्रवाई न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार होगी।








