देहरादून। देहरादून के नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पुल की एप्रोच रोड पहली ही भारी बारिश के दौरान धंसने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है।
कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने मंगलवार को कहा कि जिस पुल पर 12 जुलाई से यातायात शुरू किया गया था, उसकी एप्रोच रोड 28 जुलाई को भारी बारिश के दौरान धंस गई। उनका कहना है कि महज 16 दिनों के भीतर सड़क का धंस जाना निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
दसौनी ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की लागत से बनी परियोजना का इतनी कम अवधि में क्षतिग्रस्त होना आम जनता के धन के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जिम्मेदारी किसकी थी और अब इस मामले में जवाबदेही कैसे तय की जाएगी।
कांग्रेस ने परियोजना से जुड़ी ठेकेदार फर्मों और उनके साझेदारों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि सार्वजनिक दस्तावेजों में कुछ ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनका संबंध सत्तारूढ़ दल से होने की चर्चाएं हैं। ऐसे में पारदर्शिता और हितों के टकराव को लेकर संदेह और गहरा हो गया है।
कांग्रेस ने सरकार से कई अहम सवाल पूछे हैं, जिनमें प्रमुख रूप से यह शामिल हैं—
- टेंडर प्रक्रिया किस आधार पर पूरी की गई?
- निर्माण कार्य का गुणवत्ता परीक्षण किस एजेंसी ने किया?
- एप्रोच रोड धंसने की जिम्मेदारी किस अधिकारी, एजेंसी या ठेकेदार की तय होगी?
- क्या पूरी टेंडर प्रक्रिया और निर्माण से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएंगे?
कांग्रेस का कहना है कि यदि निर्माण कार्य सभी मानकों के अनुरूप हुआ है तो स्वतंत्र तकनीकी जांच से सच्चाई सामने आ जाएगी। लेकिन यदि कहीं लापरवाही या अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल इस मामले में भाजपा की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल और एप्रोच रोड की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
नोट: कांग्रेस ने सरकार और निर्माण प्रक्रिया पर कई आरोप लगाए हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद खबर को उसी के अनुसार अपडेट किया जा सकता है।








