देहरादून
उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था को लेकर प्रदेश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और आम जनता खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है। उत्तराखंड क्रांति दल का आरोप है कि कानून अब समान रूप से लागू नहीं हो रहा और सत्ता से जुड़े लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है। पार्टी का कहना है कि प्रदेश में हालात धीरे-धीरे “जंगलराज” जैसे बनते जा रहे हैं, जहां आम आदमी और सरकारी कर्मचारी खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। शिक्षा निदेशालय प्रकरण बना विवाद की जड़ पूरा मामला शिक्षा निदेशालय में हाल ही में हुई उस घटना से जुड़ा है, जिसमें रायपुर से विधायक उमेश शर्मा काऊ और उनके समर्थकों पर निदेशक के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोप लगे हैं। UKD का कहना है कि इस मामले में गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद अब तक विधायक की गिरफ्तारी नहीं होना कानून के राज पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। पार्टी के मुताबिक, अगर यही मामला किसी आम नागरिक या विपक्षी नेता से जुड़ा होता, तो अब तक सख्त कार्रवाई हो चुकी होती। सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप UKD के केंद्रीय महामंत्री राजेंद्र सिंह बिष्ट ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में कानून का इस्तेमाल चयनात्मक तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष और आम जनता के खिलाफ तो प्रशासन तुरंत सक्रिय हो जाता है, लेकिन सत्ताधारी दल के नेताओं के मामलों में नरमी बरती जाती है। यही वजह है कि प्रदेश में अराजकता और दबंगई को बढ़ावा मिल रहा है। 24 घंटे का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी उत्तराखंड क्रांति दल ने सरकार को साफ चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर 24 घंटे के भीतर विधायक की गिरफ्तारी नहीं की जाती, तो पार्टी प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन शुरू करेगी।
UKD ने स्पष्ट किया है कि इस आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की स्थिति के लिए पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। महिलाओं और कर्मचारियों की सुरक्षा पर चिंता
पार्टी का दावा है कि मौजूदा हालात में प्रदेश की महिलाएं, बेटियां और सरकारी कर्मचारी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं। UKD ने कहा कि वह आम जनता और कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी और अराजकता व दबंगई को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राजनीति तेज, सरकार की कार्रवाई पर नजर शिक्षा निदेशालय की घटना के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होता है या नहीं।








