देहरादून में आयोजित हिंदी लेखन प्रतियोगिता ने शिक्षा व्यवस्था की एक गंभीर हकीकत उजागर कर दी है। प्रतियोगिता में शामिल कई स्कूलों के छात्र “देहरादून” जैसे सामान्य शब्द तक सही ढंग से नहीं लिख पाए, जिससे हिंदी भाषा की स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रतियोगिता में शहर के नामी निजी और कुछ सरकारी स्कूलों के बच्चों ने हिस्सा लिया था। लेकिन कॉपियों की जांच के दौरान यह सामने आया कि बच्चों की हिंदी लेखन क्षमता बेहद कमजोर है। कई छात्रों की वर्तनी गलत पाई गई और सामान्य शब्दों में भी बड़ी गलतियां देखने को मिलीं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंग्रेजी माध्यम की बढ़ती पकड़ और घर-स्कूल दोनों जगह हिंदी के कम उपयोग के कारण यह स्थिति पैदा हो रही है। बच्चों का झुकाव मोबाइल, सोशल मीडिया और इंग्लिश कंटेंट की ओर अधिक होने से भी हिंदी लेखन प्रभावित हो रहा है। शिक्षाविदों ने इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए कहा कि भाषा केवल विषय नहीं बल्कि सोच और अभिव्यक्ति का आधार होती है। यदि शुरुआती स्तर पर ही बच्चों की हिंदी कमजोर रहेगी, तो आगे चलकर उनकी अभिव्यक्ति क्षमता भी प्रभावित होगी। अभिभावकों और शिक्षकों ने स्कूलों में हिंदी लेखन, पठन-पाठन और भाषाई गतिविधियों को बढ़ावा देने की जरूरत बताई है, ताकि बच्चों की नींव मजबूत हो सके।












