देहरादून |
CBSE Class 12 Result 2026 घोषित होने के बाद देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। इस साल का कुल पास प्रतिशत 85.20 फीसदी रहा, जो पिछले साल के 88.39 फीसदी के मुकाबले 3.19 प्रतिशत कम है। पिछले सात वर्षों में यह सबसे कमजोर परिणाम माना जा रहा है। वहीं 1 लाख 63 हजार से ज्यादा छात्रों को कम्पार्टमेंट श्रेणी में रखा गया है।
इस बार सबसे ज्यादा विवाद CBSE के नए On-Screen Marking यानी OSM सिस्टम को लेकर खड़ा हुआ है। पहली बार बोर्ड ने उत्तर पुस्तिकाओं की जांच डिजिटल स्क्रीन पर करवाई। CBSE का दावा है कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता और एकरूपता लाई गई है, लेकिन बड़ी संख्या में छात्रों ने कम अंक मिलने की शिकायत की है।
छात्रों का कहना है कि उन्होंने प्री-बोर्ड परीक्षाओं में अच्छे अंक हासिल किए थे, लेकिन बोर्ड परीक्षा में बेहद कम नंबर दिए गए। खासतौर पर Physics, Chemistry, Mathematics और Biology विषयों में अप्रत्याशित रूप से कम अंक आने की शिकायतें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
एक मामला ऐसा भी सामने आया, जिसमें एक छात्र ने JEE Main BArch परीक्षा में 99.2 पर्सेंटाइल हासिल किया, लेकिन CBSE 12वीं के गणित विषय में कम्पार्टमेंट आ गया। इस घटना ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल JEE Main पास करना ही पर्याप्त नहीं होता। IIT, NIT, IIIT और अन्य केंद्रीय तकनीकी संस्थानों में प्रवेश के लिए छात्रों को Class 12 में न्यूनतम 75 प्रतिशत अंक लाना अनिवार्य होता है। General, OBC और EWS वर्ग के लिए यह सीमा 75 प्रतिशत तय है, जबकि SC/ST वर्ग के छात्रों के लिए न्यूनतम 65 प्रतिशत अंक जरूरी हैं। ऐसे में हजारों छात्र अब एडमिशन संकट का सामना कर रहे हैं। CBSE ने विवाद बढ़ने के बाद पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की है। बोर्ड के अनुसार छात्र पहले अपनी स्कैन कॉपी प्राप्त कर सकते हैं और उसके बाद गलती लगने पर री-इवैल्युएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद अंक बढ़ भी सकते हैं और घट भी सकते हैं।
जो छात्र 75 प्रतिशत की सीमा पूरी नहीं कर पाए हैं, उनके पास अगले साल निजी उम्मीदवार के रूप में परीक्षा देने का विकल्प मौजूद है। इसके अलावा NIOS भी छात्रों के लिए एक वैकल्पिक रास्ता माना जा रहा है।
फिलहाल OSM सिस्टम तकनीकी पारदर्शिता का दावा जरूर कर रहा है, लेकिन लाखों छात्रों के भविष्य पर पड़े इसके असर ने भारत की शिक्षा व्यवस्था और मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।







