देहरादून। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर उत्तराखंड ने एक बार फिर बाघ संरक्षण के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान को दोहराया है। नवीनतम बाघ गणना के अनुसार राज्य में 560 बाघ दर्ज किए गए हैं, जिससे उत्तराखंड देश के प्रमुख बाघ-समृद्ध राज्यों में शामिल है।
राज्य के जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और राजाजी टाइगर रिजर्व बाघ संरक्षण के सबसे महत्वपूर्ण केंद्र माने जाते हैं। वन विभाग द्वारा लगातार निगरानी, आधुनिक तकनीक के उपयोग और वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम बाघों की बढ़ती संख्या के रूप में सामने आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में बाघों की बढ़ती संख्या न केवल सफल संरक्षण की कहानी है, बल्कि यह राज्य की समृद्ध जैव विविधता और स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का भी प्रमाण है।
अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस हर वर्ष 29 जुलाई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य बाघों के संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना और उनके प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने के लिए वैश्विक प्रयासों को मजबूत करना है।
वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्तराखंड की यह उपलब्धि राज्य के लिए गर्व का विषय मानी जा रही है।








