देहरादून। उत्तराखंड में कम बारिश का असर अब बिजली उत्पादन पर भी दिखाई देने लगा है। प्रदेश की नदियों में पानी का डिस्चार्ज घटने से हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स से होने वाला बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही केंद्रीय पूल से मिलने वाली बिजली और थर्मल पावर की उपलब्धता में भी कमी आने से प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है।
अधिकारियों के मुताबिक, केंद्र के हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स से अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पा रहा है। वहीं राज्य के जल विद्युत परियोजनाओं में भी नदियों का जलस्तर और डिस्चार्ज कम होने के कारण उत्पादन घटा है। ऐसे में प्रदेश की बिजली मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ रहा है।
इस स्थिति को लेकर पावर सेक्रेटरी की ओर से जल विद्युत निगम के एमडी अजय कुमार सिंह के साथ बैठक की गई। बैठक में बिजली उत्पादन और उपलब्धता की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में 2025-26 में बिजली उत्पादन में काफी कमी दर्ज की गई है और उत्पादन करीब 715 मेगावाट के आसपास रह गया है।
कम बारिश के चलते नदियों में पानी का डिस्चार्ज लगातार प्रभावित हो रहा है। इसका सीधा असर हाइड्रो पावर स्टेशनों की उत्पादन क्षमता पर पड़ रहा है। अधिकारियों ने आने वाले दिनों में भी उत्पादन में और कमी आने की आशंका जताई है, यदि जल प्रवाह में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
वहीं, केंद्रीय पूल से मिलने वाली बिजली में कमी और थर्मल पावर की उपलब्धता घटने से प्रदेश को अपनी मांग पूरी करने के लिए अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करनी पड़ रही है। ताजा स्थिति में पीक डिमांड के दौरान बिजली की उपलब्धता को लेकर दबाव और बढ़ सकता है।
उत्तराखंड की बिजली व्यवस्था में जल विद्युत की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में बारिश और नदियों के जल प्रवाह में कमी का असर सीधे बिजली उत्पादन पर पड़ता है। यूपीसीएल की ओर से सितंबर 2026 के दैनिक पावर सिस्टम एनर्जी रिपोर्ट भी जारी की गई है, जिसमें राज्य की बिजली व्यवस्था से जुड़े आंकड़े दर्ज किए जा रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि बिजली की उपलब्धता बनाए रखने के लिए विभिन्न स्रोतों से बिजली की व्यवस्था पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में बारिश और जल प्रवाह की स्थिति के आधार पर हाइड्रो पावर उत्पादन में बदलाव देखने को मिल सकता है।








