देहरादून : विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। इस बार विवाद मंदिर के वर्तमान रावल भीमाशंकर लिंग द्वारा अपने शिष्य शांतिलिंग शिवाचार्य को उत्तराधिकारी घोषित किए जाने को लेकर खड़ा हुआ है। केदारनाथ मंदिर के पूर्व पुजारी शांतिवीर लिंग ने इस पूरे मामले पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे बदरी-केदार मंदिर समिति के नियमों के विरुद्ध बताया है।
पूर्व पुजारी शांतिवीर लिंग का कहना है कि केदारनाथ धाम में द्वापर युग से लेकर आज तक उत्तराधिकारी घोषित करने की कोई परंपरा या व्यवस्था नहीं रही है। उन्होंने कहा कि नए रावल का चयन हमेशा बदरी-केदार मंदिर समिति द्वारा किया जाता रहा है, लेकिन वर्तमान रावल भीमाशंकर लिंग ने नियमों को दरकिनार करते हुए अपने शिष्य शांतिलिंग शिवाचार्य को नांदेड़ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
पूर्व पुजारी ने आरोप लगाया कि शांतिलिंग शिवाचार्य स्वयं को केदारनाथ का उत्तराधिकारी बताकर दक्षिण भारत में अनैतिक तरीके से धन संग्रह कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान रावल ने अपने चयन के समय लिखित रूप में यह आश्वासन दिया था कि दक्षिण भारत से प्राप्त होने वाला दान मंदिर समिति को सौंपा जाएगा, लेकिन वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान भी दक्षिण भारत से मिलने वाले दान का कोई हिस्सा मंदिर समिति को नहीं दिया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान रावल और उनके शिष्य “दक्षिण केदार” के नाम पर संपत्तियां और आर्थिक संसाधन जुटा रहे हैं। पूर्व पुजारी ने मांग की कि एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दक्षिण भारत में वर्तमान रावल भीमाशंकर लिंग और उनके शिष्य की संपत्तियों तथा आर्थिक गतिविधियों की जांच कराई जाए।
इस पूरे मामले ने अब कानूनी मोड़ भी ले लिया है। नैनीताल हाईकोर्ट ने इस प्रकरण पर बदरी-केदार मंदिर समिति से जवाब तलब किया है। मामले को लेकर धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।








