रुद्रप्रयाग।
केदारनाथ हाईवे पर स्थित तिलवाड़ा बाजार में चल रही अतिक्रमण हटाने की मुहिम अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। प्रशासन द्वारा बुलडोजर चलाकर कार्रवाई तेज किए जाने के बावजूद स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अभियान निष्पक्ष न होकर चयनात्मक तरीके से चलाया जा रहा है। प्रभावशाली और रसूखदार लोगों से जुड़े अतिक्रमणों पर नरमी, जबकि गरीब और सामान्य नागरिकों के ढांचों पर सख्त कार्रवाई किए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्षों से कुछ प्रभावशाली लोग सरकारी भूमि पर कब्जा जमाए हुए हैं। आरोप है कि मुआवजा लेकर भी दोबारा अतिक्रमण किया गया, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के अभियंताओं और संबंधित विभागों ने इस पर आंखें मूंदे रखीं। वहीं जिनके पास कोई राजनीतिक या विभागीय पहुंच नहीं है, उनके खिलाफ बिना किसी रियायत के बुलडोजर चलाया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कुछ जनप्रतिनिधियों और सत्ताधारी नेताओं की आड़ में अतिक्रमण को संरक्षण मिल रहा है। एनएच खंड और तहसील स्तर के कुछ अधिकारियों पर विभागीय मिलीभगत के आरोप भी लग रहे हैं। बीते वर्षों में कई जिलाधिकारी और एनएच के वरिष्ठ अधिकारी बदले गए, लेकिन तिलवाड़ा में कार्रवाई को लेकर उठने वाले भेदभाव के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं। हाल ही में नवनियुक्त जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने तिलवाड़ा का निरीक्षण कर अतिक्रमण हटाने के सख्त निर्देश दिए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि केदारनाथ हाईवे को केदारनाथ धाम यात्रा 2026 से पहले जाम मुक्त, सुरक्षित और सुगम बनाना प्रशासन की प्राथमिकता है। डीएम ने भरोसा दिलाया कि कार्रवाई पूरी तरह निष्पक्ष और समान रूप से की जाएगी। कुछ अतिक्रमणकारियों ने स्वयं ढांचे हटाने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है। प्रशासन का कहना है कि तय समयसीमा के बाद कार्रवाई और सख्त की जाएगी। हालांकि, क्षेत्र में आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि अतिक्रमण हटाना है तो कानून सभी पर बराबर लागू होना चाहिए, न कि पहचान और प्रभाव के आधार पर। प्रशासन की ओर से दावा किया गया है कि यात्रा सीजन से पहले तिलवाड़ा को जाम मुक्त बनाने के लिए सड़क किनारे रखा मलबा, अस्थायी ढांचे और अतिक्रमण हटाए जा रहे हैं, साथ ही चालानी कार्रवाई भी तेज की गई है। लेकिन जमीनी स्तर पर उठ रहे सवालों के जवाब अभी बाकी हैं।










