नैनीताल, 24 जून। उत्तराखंड के ग्राम्य विकास, लघु एवं सूक्ष्म उद्योग, खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री भरत चौधरी ने बुधवार को राज्य अतिथि गृह नैनीताल में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में मनरेगा, पीएमजीएसवाई, ग्राम्य विकास, उद्योग, खादी ग्रामोद्योग, पशुपालन, मत्स्य पालन समेत विभिन्न विभागों की योजनाओं और कार्यों की प्रगति का जायजा लिया गया। इस दौरान मंत्री ने अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए।
बैठक के दौरान ग्राम्य विकास मंत्री भरत चौधरी ने कहा कि उत्तराखंड की आर्थिकी को मजबूत करने में पशुपालन और मत्स्य पालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने इन दोनों क्षेत्रों को राज्य के लिए “गेम चेंजर” बताते हुए कहा कि यदि वैज्ञानिक तरीके से इनका विस्तार किया जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए स्रोत विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, विपणन व्यवस्था को मजबूत करने तथा मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही पशु नस्ल सुधार और बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास करने को कहा।

मंत्री ने खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय कारीगरों को प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराकर खादी उत्पादों को नई पहचान दी जा सकती है। उन्होंने अधिकारियों को खादी और ग्रामोद्योग आधारित स्वरोजगार योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए।
बैठक में लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों को लेकर भी विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि जनपद में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार किया जाए और नई इकाइयों की स्थापना की प्रक्रिया को तेज किया जाए। उन्होंने उद्योग विभाग को निर्देशित किया कि स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि निवेशकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
मनरेगा की समीक्षा के दौरान मंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि 1 जुलाई से नए कार्य प्रारंभ होने से पहले सभी पुराने बकाया भुगतान तत्काल किए जाएं। उन्होंने कहा कि मजदूरों और लाभार्थियों को समय पर भुगतान मिलना सरकार की प्राथमिकता है। साथ ही उन्होंने मानसून के दौरान जल संरक्षण और जल संवर्धन कार्यों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
मंत्री ने कहा कि ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की तर्ज पर ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ अभियान भी चलाया जाए और इसे जनभागीदारी के माध्यम से जनआंदोलन का रूप दिया जाए। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए वृक्षारोपण अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में विकास कार्यों की पारदर्शिता को लेकर भी मंत्री ने सख्त रुख अपनाया। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी योजना स्थलों पर मानकों के अनुरूप सूचना बोर्ड अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसी कार्यस्थल पर बोर्ड नहीं लगाया गया तो उस कार्य को “लावारिस” माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
प्रधानमंत्री आवास योजना की समीक्षा करते हुए मंत्री ने कहा कि प्रत्येक पात्र और जरूरतमंद परिवार को आवास उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित न रहे और सभी लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए।

उन्होंने अधिकारियों को कृषि भूमि की सुरक्षा और जंगली जानवरों से फसलों को बचाने के लिए प्रभावी घेरबाड़ योजना संचालित करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि यदि किसानों की खेती सुरक्षित होगी तो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के अवसर भी बढ़ेंगे।
महिला सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मंत्री ने स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन व्यवस्था को बेहतर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि महिला समूहों को स्थायी बाजार उपलब्ध कराया जाए ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके। मंत्री ने बताया कि वर्तमान में ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत लगभग 23 हजार महिलाएं लाभान्वित हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शेष 17 हजार महिला समूह सदस्यों को भी लखपति बनाने की दिशा में प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही महिलाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने और प्रत्येक विकासखंड में अलग-अलग उत्पाद आधारित क्लस्टर विकसित करने पर भी जोर दिया।
पीएमजीएसवाई की समीक्षा के दौरान मंत्री ने कहा कि योजना के अंतर्गत छूटी हुई सभी सड़कों के प्रस्ताव शीघ्र शासन को भेजे जाएं। बैठक में बताया गया कि पीएमजीएसवाई-4 के प्रथम चरण में 17 सड़कों को स्वीकृति मिल चुकी है, जिनकी कुल लंबाई 93 किलोमीटर और लागत 125 करोड़ रुपये है। इन कार्यों के टेंडर भी पूरे हो चुके हैं। वहीं दूसरे चरण में 12 सड़कों के लिए 114 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है, जिनकी कुल लंबाई 92 किलोमीटर है।
इससे पूर्व जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने मंत्री और जनप्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए जनपद में संचालित विकास योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आगामी मानसून को देखते हुए जिले में जल संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही उन्होंने घरों के बंटवारे के कारण अलग हुए परिवारों को शौचालय आवंटन की आवश्यकता से भी मंत्री को अवगत कराया।
बैठक में विधायक सरिता आर्या, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, दर्जा राज्यमंत्री दिनेश आर्य, शांति मेहरा, सचिव जिला विकास प्राधिकरण मनीष कुमार, जिला विकास अधिकारी गोपाल गिरी, एपीडी चंद्रा फर्त्याल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।








