देहरादून। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ उत्तराखंड के अनिश्चितकालीन धरने को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। पूर्व विधानसभा प्रत्याशी एवं युवा नेता मोहित डिमरी ने देहरादून स्थित एकता विहार धरना स्थल पहुंचकर आंदोलन को अपना समर्थन दिया और युवाओं की मांगों को जायज बताया।
संघ के बैनर तले प्रशिक्षित बेरोजगार युवा बीते 19 मई से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं। आंदोलनकारी युवाओं का कहना है कि राज्य गठन के 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी B.Sc MLT (मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी) कोर्स कर चुके युवाओं के लिए अब तक स्पष्ट सेवा नियमावली तैयार नहीं की गई है। इससे पंजीकृत और प्रशिक्षित युवा सरकारी नौकरियों से वंचित हैं।
मोहित डिमरी ने कहा कि प्रदेश के युवाओं के साथ यह अन्याय है। उन्होंने मांग की कि आईपीएचएस (IPHS) मानकों के अनुसार प्रदेश में लैब तकनीशियनों के पदों का तत्काल सृजन किया जाए और सभी रिक्त पदों को पारदर्शी तरीके से वर्षवार मेरिट के आधार पर भरा जाए। साथ ही लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया लंबित होने के कारण ओवरएज हो चुके अभ्यर्थियों को एकमुश्त आयु सीमा में छूट देने की भी मांग उठाई गई।
धरना दे रहे संघ के पदाधिकारियों ने सरकारी लैब्स के निजीकरण का भी विरोध किया। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों की लैब्स को निजी कंपनियों को सौंपने से स्थायी रोजगार समाप्त हो रहे हैं और जांच रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ रहा है।
संघ के अध्यक्ष आशीष चंद्र और प्रदेश महासचिव मयंक राणा ने कहा कि प्रदेश के पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में लैब तकनीशियनों की भारी कमी है। इसके चलते लोगों को छोटी-छोटी जांचों के लिए भी निजी लैब्स और दूर-दराज क्षेत्रों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं सरकारी अस्पतालों में करोड़ों की मशीनें उपयोग के अभाव में बंद पड़ी हैं।
संघ पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
मोहित डिमरी के समर्थन के बाद आंदोलन को नई मजबूती मिली है और अब युवाओं को उम्मीद है कि सरकार उनकी लंबे समय से लंबित मांगों पर जल्द फैसला लेगी।








