देहरादून
उत्तराखंड में वन्यजीवों के लगातार बढ़ते हमले अब गंभीर चिंता का विषय बन चुके हैं। प्राकृतिक सुंदरता और घने जंगलों वाले प्रदेश में गुलदार, बाघ और भालू जैसे वन्यजीव अब आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहे हैं, जिससे लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। गांवों से लेकर सड़क और घरों तक वन्यजीवों की आवाजाही आम होती जा रही है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 के बीच प्रदेश में वन्यजीव हमलों की 118 घटनाएं सामने आई हैं। इन घटनाओं में 20 लोगों की मौत हुई है, जबकि 98 लोग घायल हुए हैं। लगातार हो रहे हमलों के बावजूद लोगों में सुरक्षा को लेकर भरोसा कम होता दिखाई दे रहा है।
इस मुद्दे पर अब सत्ता पक्ष के नेता भी खुलकर चिंता जाहिर करने लगे हैं। पुरोला से भाजपा विधायक दुर्गेश्वर लाल ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग की लापरवाही कहीं न कहीं इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि वन विभाग के “काले कानूनों” के कारण आम जनता परेशान हो रही है और वन्यजीवों के बढ़ते खतरे से लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। विधायक ने मांग की कि सरकार और वन विभाग को इस दिशा में कठोर और प्रभावी कदम धरातल पर उतारने होंगे। वहीं इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा विधायक खुद सरकार की नाकामी उजागर कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वन्यजीव हमलों को रोकने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। धस्माना ने कहा कि सत्ता पक्ष के नेता पहले बयान देते हैं, लेकिन आलाकमान के दबाव में बाद में अपने बयान बदल लेते हैं। प्रदेश में लगातार बढ़ते वन्यजीव हमलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अब सवाल यह है कि आखिर कब तक लोग जंगल और आबादी के बीच बढ़ते इस संघर्ष का शिकार होते रहेंगे।








