देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लंबे समय से अवैध प्लॉटिंग, नियमों के विपरीत निर्माण और भूमाफियाओं के बढ़ते प्रभाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। वर्षों तक यह धारणा बनी रही कि ऐसे मामलों में कार्रवाई करना आसान नहीं है और नोटिस तथा चेतावनियों के बावजूद कई अवैध निर्माण कार्य निर्बाध रूप से आगे बढ़ते रहते हैं। हालांकि, पिछले कुछ समय में स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
जब से वरिष्ठ आईएएस अधिकारी बंशीधर तिवारी ने मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के उपाध्यक्ष का दायित्व संभाला है, तब से अवैध निर्माण और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। कुल्हान, चंद्रवनी समेत शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब विकास कार्यों में नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एमडीडीए की हालिया कार्यशैली ने यह संदेश दिया है कि प्राधिकरण अब केवल शिकायतों का इंतजार नहीं कर रहा, बल्कि अपने स्तर पर निगरानी करते हुए अवैध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। यही कारण है कि अवैध निर्माण करने वालों और भूमि कारोबार से जुड़े लोगों के बीच प्रशासन की अगली कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है।
जानकारों का मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में सिफारिशों और प्रभाव के बजाय नियमों और कानूनों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे उन लोगों में चिंता बढ़ी है जो पहले यह मानकर चलते थे कि किसी भी स्तर पर मामले को “मैनेज” किया जा सकता है।
एमडीडीए की कार्रवाई केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि लगातार और व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ रही है। यही वजह है कि शहर में अवैध प्लॉटिंग और अनधिकृत निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगे हैं।
प्रशासनिक हलकों में भी यह चर्चा है कि बंशीधर तिवारी की कार्यशैली पारदर्शिता और जवाबदेही पर आधारित है। उनका स्पष्ट संदेश है कि वैध निर्माण कार्य करने वालों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई निश्चित है।
तेजी से विस्तार कर रहे देहरादून जैसे शहर में सुनियोजित विकास केवल नई इमारतों और चौड़ी सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्माण नियमों के समान और निष्पक्ष अनुपालन पर भी निर्भर करता है। इसी कारण कई लोग एमडीडीए की मौजूदा कार्यप्रणाली को “नियम आधारित विकास मॉडल” के रूप में देख रहे हैं।
अंततः किसी भी प्रशासनिक व्यवस्था की पहचान उसके भाषणों से नहीं, बल्कि उसके फैसलों और कार्रवाई से होती है। फिलहाल देहरादून में एमडीडीए की सक्रियता यह संकेत दे रही है कि अवैध निर्माण करने वालों के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जबकि नियमानुसार कार्य करने वालों के लिए व्यवस्था पहले से अधिक स्पष्ट और पारदर्शी होती दिखाई दे रही है।









