देहरादून:
देहरादून जिले में बेटियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक सराहनीय पहल ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ तेजी से सफलता की कहानी लिख रहा है। जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में शुरू की गई इस योजना ने उन बालिकाओं के जीवन में नई रोशनी भर दी है, जो पारिवारिक संकट, आर्थिक तंगी या माता-पिता के निधन के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर हो गई थीं।
प्रशासन द्वारा अब तक जिले की 136 ऐसी बालिकाओं को चिन्हित किया गया है, जिन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बेटी केवल संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों से वंचित न रह जाए।
इस पहल की खास बात इसकी पारदर्शी और सख्त कार्यप्रणाली है। प्रशासन ने एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की है, जिसके तहत बहु-विभागीय टीमें खुद जरूरतमंद बालिकाओं के घर जाकर उनकी स्थिति का सत्यापन करती हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सहायता वास्तव में जरूरतमंदों तक ही पहुंचे।
वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था के लिए भी प्रशासन ने अभिनव तरीका अपनाया है। कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) और राइफल क्लब के माध्यम से धन जुटाकर सीधे आईसीडीएस विभाग को सौंपा जा रहा है, जिससे बालिकाओं की शिक्षा—प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक—बिना किसी बाधा के जारी रह सके। ‘प्रोजेक्ट नंदा-सुनंदा’ न सिर्फ शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत कर रहा है। यह पहल आने वाले समय में अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बन सकती है।










