देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के नामकरण को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मांग की है कि इस महत्वपूर्ण एक्सप्रेसवे का नाम बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के नाम पर रखा जाए, ताकि यह उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि साबित हो सके।

हरीश रावत ने कहा कि अंबेडकर जयंती के अवसर पर यदि इस एक्सप्रेसवे का नाम उनके नाम पर रखा जाता है, तो यह सामाजिक न्याय और संविधान निर्माता के प्रति सम्मान का प्रतीक होगा। हालांकि, उन्होंने एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के साथ-साथ देहरादून शहर में बढ़ते ट्रैफिक को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि इस नए कॉरिडोर के चालू होने के बाद शहर में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ेगी, जिससे जाम और bottlenecks की समस्या और गंभीर हो सकती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि इसका सीधा असर आम जनजीवन पर पड़ेगा। लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए ज्यादा समय सड़क पर बिताना पड़ेगा और यातायात व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इसका असर पहाड़ी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। गाड़ियों की आवाजाही धीमी होने और ट्रैफिक बढ़ने के कारण यातायात खर्च और किराए में बढ़ोतरी की आशंका है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ पड़ेगा। हरीश रावत ने राज्य सरकार से अपील की कि वह इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए ट्रैफिक प्रबंधन, वैकल्पिक मार्गों और शहरी योजना पर ठोस कदम उठाए, ताकि विकास के साथ-साथ आम जनता को किसी तरह की परेशानी न हो।









