देहरादून। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री आवास के बाहर किए गए धरने और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध एवं राजनीतिक घटनाक्रम के बीच उत्तराखंड की राजनीति में सोमवार को भी सियासी घमासान देखने को मिला। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस मुख्यालय के घेराव का कार्यक्रम आयोजित किया। हालांकि पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र कनक चौक पर बैरिकेडिंग लगाकर भाजपा कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोक दिया।
भाजपा कार्यकर्ता महानगर कार्यालय से रैली के रूप में कांग्रेस मुख्यालय की ओर बढ़े। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी की। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो। पुलिस द्वारा बैरिकेडिंग लगाए जाने के बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वहीं प्रदर्शन किया।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी लोकतांत्रिक मर्यादाओं का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं। उनका आरोप था कि संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाकर कांग्रेस लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा का यह प्रदर्शन कांग्रेस को लोकतांत्रिक मर्यादाओं का स्मरण कराने के उद्देश्य से किया गया।
दूसरी ओर, कांग्रेस कार्यालय पर भी बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि वे भाजपा के प्रदर्शन का लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देने के लिए तैयार थे।
कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने भाजपा के प्रदर्शन को “फिसड्डी बम” बताते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ता कांग्रेस मुख्यालय तक पहुंच ही नहीं सके। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा अध्यक्ष बीच रास्ते से ही लौट गए, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ता उनका इंतजार करते रहे। धस्माना ने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का दायित्व सरकार और प्रधानमंत्री से सवाल पूछना है और कांग्रेस वही कर रही है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था के चलते दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आने से बचे और किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। दोनों दल एक-दूसरे पर लोकतांत्रिक मूल्यों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं, जबकि आगामी राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए प्रदेश की सियासत में यह टकराव आगे भी जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।








