देहरादून/बद्रीनाथ। उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में दान-चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद अब VIP दर्शन के नाम पर ₹1100 प्रति श्रद्धालु शुल्क वसूले जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि यह शुल्क मंदिर समिति के बोर्ड की मंजूरी के बिना लिया गया, जिसके बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, कपाट खुलने के शुरुआती दिनों में श्रद्धालुओं के लिए VIP दर्शन की व्यवस्था निःशुल्क थी, लेकिन 29 मई के बाद अचानक ₹1100 प्रति श्रद्धालु शुल्क लिया जाने लगा। आरोप है कि इस शुल्क को लागू करने से पहले मंदिर समिति के बोर्ड से कोई औपचारिक स्वीकृति नहीं ली गई।
बोर्ड से मंजूरी नहीं, फिर कैसे शुरू हुई वसूली?
बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने स्पष्ट कहा है कि VIP दर्शन शुल्क को लेकर बोर्ड की किसी बैठक में कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। ऐसे में बिना बोर्ड की अनुमति शुल्क वसूलना नियमों के विपरीत माना जा रहा है।
इस बयान के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि बोर्ड ने कोई अनुमति नहीं दी थी, तो फिर शुल्क वसूली किसके आदेश पर शुरू हुई और इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की भूमिका पर सवाल
मामले में अब मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की भूमिका भी चर्चा में है। बोर्ड के अध्यक्ष होने के नाते यह सवाल उठ रहा है कि यदि कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ था, तो फिर इतने दिनों तक VIP शुल्क की वसूली कैसे होती रही?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिना बोर्ड प्रस्ताव के शुल्क लिया गया है, तो यह प्रशासनिक प्रक्रिया और निर्धारित नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।
वैयक्तिक सहायक की भूमिका भी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच में यह देखा जाएगा कि शुल्क लागू करने और उसकी प्रक्रिया में उनकी क्या भूमिका रही।
पुजारियों और हक-हकूकधारियों ने भी जताई थी आपत्ति
बताया जा रहा है कि VIP दर्शन शुल्क लागू किए जाने के समय ही मंदिर से जुड़े पुजारियों और हक-हकूकधारियों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि धार्मिक परंपराओं और नियमों के अनुरूप इस प्रकार का शुल्क बोर्ड की स्वीकृति के बिना लागू नहीं किया जा सकता।
वहीं, कई श्रद्धालुओं ने भी पहले VIP दर्शन व्यवस्था का विरोध करते हुए सभी भक्तों के लिए समान दर्शन व्यवस्था की मांग उठाई थी।
आधिकारिक जांच में शामिल हुआ मामला
बीकेटीसी ने अब VIP दर्शन शुल्क से जुड़े पूरे प्रकरण को आधिकारिक जांच में शामिल कर लिया है। माना जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट होगी और आवश्यक कार्रवाई भी की जा सकती है।
आस्था और पारदर्शिता दोनों पर सवाल
बद्रीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में यदि बिना वैधानिक स्वीकृति के किसी प्रकार की शुल्क व्यवस्था लागू की गई है, तो यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का विषय नहीं, बल्कि धार्मिक संस्थानों की पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के विश्वास से जुड़ा गंभीर मामला भी है।
अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि VIP दर्शन शुल्क किसके निर्देश पर शुरू किया गया और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी।
नोट: यह समाचार उपलब्ध आरोपों, संबंधित पक्षों के बयानों और सामने आई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। जांच पूरी होने के बाद तथ्य और निष्कर्ष बदल सकते हैं।








