देहरादून: उत्तराखंड में लगातार बढ़ रही वनाग्नि की घटनाओं को लेकर वन विभाग उत्तराखंड द्वारा मंगलवार को वन विभाग स्थित मंथन सभागार में प्रेस वार्ता आयोजित की गई। प्रेस वार्ता में प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए वनाग्नि नियंत्रण और प्रबंधन को लेकर सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की विस्तृत जानकारी दी।
वन मंत्री ने कहा कि पृथ्वी के लगातार बढ़ते तापमान, लंबे समय तक सूखा, अनियमित मानसून, अल नीनो जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों और अन्य कारणों की वजह से प्रदेश में वनाग्नि की घटनाओं में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के टिहरी, चमोली, पौड़ी, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिलों में आग की घटनाएं अधिक सामने आई हैं।
उन्होंने कहा कि वन विभाग उत्तराखंड शासन, विभिन्न संस्थाओं और स्थानीय जनसहभागिता के सहयोग से वनाग्नि पर नियंत्रण के लिए लगातार कार्य कर रहा है। इसके तहत जागरूकता अभियान, प्रचार-प्रसार, स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण और आधुनिक नवाचारों को अपनाया जा रहा है ताकि जंगलों को आग से बचाया जा सके।
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि जंगलों में आग लगने की स्थिति में केवल वीडियो बनाने की बजाय आग बुझाने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता और सामूहिक प्रयासों से ही वनाग्नि जैसी गंभीर समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि पिछले दस वर्षों में प्रदेश में वनाग्नि की कुल 14,638 घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे 23,682.77 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। इन घटनाओं में 35 लोगों की मौत हुई जबकि 76 लोग घायल हुए हैं। वहीं वर्ष 2026 में अब तक वनाग्नि की 394 घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें 331.12 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है तथा एक व्यक्ति की मृत्यु हुई है।
प्रेस वार्ता के दौरान वन मंत्री ने मीडिया से भी सहयोग की अपील करते हुए कहा कि वनाग्नि को लेकर अनावश्यक अफवाह फैलाने से बचें और लोगों को जागरूक करने में सकारात्मक भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि मीडिया और आमजन के सहयोग से ही जंगलों को सुरक्षित रखा जा सकता है।








