देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय दलों की बहस तेज हो गई है। हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) ने भाजपा और कांग्रेस दोनों पर तीखा हमला बोला है।
यूकेडी का कहना है कि वर्तमान मंत्रिमंडल में शामिल किए गए कई नेता पहले कांग्रेस से जुड़े रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा और कांग्रेस के बीच वैचारिक अंतर अब लगभग खत्म हो चुका है। पार्टी ने आरोप लगाया कि दोनों दल केवल नाम से अलग हैं, जबकि नीतियां और फैसले “दिल्ली से नियंत्रित” होते हैं।
यूकेडी नेताओं का कहना है कि प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से राष्ट्रीय दलों का वर्चस्व रहा है, लेकिन इससे स्थानीय मुद्दे पीछे छूटते रहे हैं। ऐसे में अब उत्तराखंड की जनता को एक मजबूत क्षेत्रीय विकल्प के रूप में यूकेडी पर विचार करना चाहिए, जहां नीतियां प्रदेश के लोगों के बीच बैठकर तय हों।
पार्टी ने यह भी स्वीकार किया कि अतीत में कुछ मौकों पर यूकेडी के विधायकों ने सरकार को समर्थन दिया, जिसकी राजनीतिक कीमत पार्टी को 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में चुकानी पड़ी। लेकिन अब यूकेडी ने साफ कर दिया है कि वह भविष्य में किसी भी राष्ट्रीय दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी। यूकेडी का दावा है कि पार्टी ने जमीनी मुद्दों पर लगातार आवाज उठाई है और अब बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत किया गया है। युवाओं, पूर्व सैनिकों और महिलाओं के नए नेतृत्व ने पार्टी को नई ऊर्जा दी है, जिससे वह आगामी चुनावों में एक सशक्त विकल्प के रूप में उभरने का दावा कर रही है। पार्टी ने जनता से अपील की है कि यदि वे व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर राज्यहित को प्राथमिकता दें, तो उत्तराखंड में एक नई राजनीतिक दिशा संभव है।








