देहरादून में प्रस्तावित एक दिवसीय विशेष विधानसभा सत्र को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह सत्र जनहित के मुद्दों से भटककर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मंच बनता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा जैसे महत्वपूर्ण मंच का उपयोग जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा के लिए होना चाहिए, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में इसका इस्तेमाल विपक्ष को घेरने और आलोचना करने के लिए किया जा रहा है।
गरिमा दसौनी ने सत्र पर होने वाले खर्च को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका कहना है कि एक दिन के विशेष सत्र पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, जो उत्तराखंड जैसे राज्य के राजकोष पर अतिरिक्त बोझ डालता है। उन्होंने इसे जनता और टैक्सपेयर के पैसे का दुरुपयोग बताया। कांग्रेस प्रवक्ता ने आगे कहा कि सरकार के पास पहाड़ी क्षेत्रों में बीमार या जरूरतमंद महिलाओं को डांडी-कांडी के जरिए लाने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। वहीं चार धाम यात्रा के दौरान शवों को लाने के लिए हेलीकॉप्टर जैसी मूलभूत व्यवस्थाएं भी पूरी तरह उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद सरकार “अनावश्यक सत्र” पर खर्च कर रही है, जो प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने मांग की कि सरकार को इस तरह के खर्चों पर पुनर्विचार करना चाहिए और जनता के पैसे को स्वास्थ्य सेवाओं, चार धाम यात्रा व्यवस्थाओं और बुनियादी सुविधाओं में लगाना चाहिए। इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज होने की संभावना है, वहीं आगामी विशेष सत्र को लेकर सियासी माहौल और भी गर्म हो गया है।







