देहरादून:
उत्तराखंड की राजनीति में आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। पुष्कर सिंह धामी ने हैट्रिक जीत के लक्ष्य के साथ अपनी ‘टीम 11’ को मैदान में उतार दिया है। इस टीम में अनुभवी चेहरों के साथ-साथ नए और ऊर्जावान नेताओं को भी शामिल किया गया है, जिससे संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर संतुलन साधने की कोशिश की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धामी का यह कदम साफ संकेत देता है कि भाजपा आगामी चुनावों में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती। कैबिनेट विस्तार और नई जिम्मेदारियों के जरिए पार्टी ने यह दिखाने की कोशिश की है कि वह हर वर्ग—युवा, महिला, दलित और क्षेत्रीय संतुलन—को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
इस ‘टीम 11’ में कुछ ऐसे चेहरे भी शामिल किए गए हैं, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय थे लेकिन अब उन्हें सरकार में अहम जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, कुछ वरिष्ठ नेताओं को बनाए रखते हुए अनुभव का लाभ लेने की रणनीति अपनाई गई है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से यह भी माना जा रहा है कि धामी सरकार ने कैबिनेट में प्रतिनिधित्व देकर दलित वोट बैंक और सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है। साथ ही महिला सशक्तिकरण पर भी खास फोकस रखा गया है, जिससे सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ जनता तक पहुंच सके। सूत्रों के अनुसार, नई टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती ‘परफॉर्मेंस’ होगी। सरकार की उपलब्धियों को जमीनी स्तर तक पहुंचाना और जनता के बीच विश्वास बनाए रखना ही इस टीम की सफलता का पैमाना होगा।
धामी सरकार का यह कदम न सिर्फ संगठनात्मक मजबूती की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि भाजपा 2027 के चुनावों के लिए अभी से पूरी तैयारी में जुट गई है।










